Rajnish Kumar Royal Biography




Rajnish KumarRajnish KumarRajnish KumarRajnish Kumar
 Rajnish KumarRajnish Kumar
 Rajnish Kumar
Rajnish Kumar
Bollywood Film/Theatre Actor, Director, Producer & Writer
Arvind Gaur 






मेरा इतिहास

मेरा नाम रजनीश कुमार है ! मेरा जन्म 04 /03/1998 को हुआ ! मै बिहार के सहरसा जिला के सोनबर्षा राज प्रखंड के एक छोटे से गांव दामोदर पुर बराही का स्थायी निवासी हूँ ! मैं तीन भाई हूँ ! मैं सबसे छोटा हूँ ! सबसे बड़े का नाम रंजन कुमार है ! उनसे छोटे का नाम रोशन कुमार है ! और तीसरा मैं सबसे छोटा यानी मैं ! मेरे पिताजी का नाम श्री सिकंदर मेहता है ! मेरी माँ का नाम श्रीमती पूनम देवी है ! मेरे पिताजी किसान हैं ! मेरी माँ गृहिणी हैं !  मेरे पिताजी चार भाई हैं ! सबसे बड़े का नाम श्री निवास मेहता है, जो किसान हैं ! उनसे छोटे मेरे पापा है ! मेरे पापा से छोटे का नाम श्री सदानंद मेहता है ( आर्मी ) और सबसे छोटे का नाम श्री सचितानंद मेहता है जो किसान हैं ! मेरा बचपन गांव में ही खेल कूद में बिता ! मेरी बचपन की पढाई गांव के सरकारी स्कूल ( मद्द्य विद्यालय बराही स्कूल ) में हुआ ! जिस समय मैं इस स्कुल में नामांकन लिया था उस समय श्री गजेंद्र झा प्रिन्सिपल सर थे ! वे बरे ही अच्छे सर थे लेकिन वो पान ज्यादा खाते थे ! मेरे नामांकन के तीन चार साल बाद हो रिटायर हो गए !एक से आठ तक की पढाई पूरा किया ! गांव में पढाई के साथ साथ सभी दोस्तों के साथ मिलकर क्रिकेट बहुत ही ज्यादा खेलता था ! और जिस टीम में मैं रहता था वो टीम अक्सर जीतता था ! मेरे लिए लड़ाई होते रहता था ! उस समय मेरे अंदर जो जूनून था क्रिकेट खेलने का शायद ही किसी को था मेरे टीम में ! स्कूलों में भी बहुत ज्यादा शरारत करता था और सर से मार भी खता था ! मेरे स्कूल के प्रिंसिपल सर थे जो बड़े ही गुस्से वाले थे ! उनको देखते ही सरे स्कूल के टीचर को घबराहट होते रहता था की कब वो चले जाय ! तो सोचिये जब टीचर घबराहट होता था तो सरे स्टूडेंट्स का क्या होता होगा ! वो प्रिंसिपल सर का नाम श्री शिवनंदन पासवान था ( अभी भी हैं वो सर ) ! मेरे स्कूल के सबसे अच्छे सर थे दिनेश सर मेरे लिए और किसी के लिए था की नहीं मुझे मालूम नहीं ! दिनेश सर पढाते भी अच्छे थे ! मैडम में रेणू मैडम , रूपम ( रोजी ) मैडम, अरुणा मैडम ! तीन नई मैडम आयी थी जिनका नाम आरती मैडम, और साधना मैडम और नंदनी मैडम ( राजपूत ) थी ! मुझे ठीक से याद नहीं है ! जब मैं पांचवां या छठा की कक्षा में था तो दिनेश सर का ट्रांसफर हो गया था ! तब दो नए सर आये जिनका नाम श्री अमरेंदर प्रसाद मेहता है ! ये सर मेरे ही गांव के रहने वाले हैं ! अपने घर से थोड़ा दूर हट कर ये सर का घर है ! और एक सर का नाम श्री उमेश सिंह ( राजपूत ) है ! इनका घर बराही है ! ये दोनों बड़े ही अच्छे सर थे मेरे लिए, दुसरो के बारे में तो मेरे को मालूम नहीं ! ये दोनों सर पढ़ाते बहुत अच्छे थे ! दोनों सर में से सबसे अच्छा अमरेंदर सर पढ़ाते थे ! मेरा मन पढाई में कम और खेल कूद में ज्यादा लगता था , और संगीत में तो सबसे ज्यादा ! उस समय मैं गांव में बहुत मस्ती करता था ! आठवीं कक्षा तक की पढाई उसी स्कूल से किया ! फिर आठवीं कक्षा का सर्टिफिकेट लेकर नवमी कक्षा में मौजी लाल भगत ( एम एल बी ) उच्च विद्यालय काशनगर ( जो मेरे गांव से 05 से 06 किलोमीटर की दुरी पर है ) में नामांकन लिया ( 2012 ) में ! नामांकन लेने के कुछ दिन बाद मैं पूर्णिया पढाई करने चला गया अपने बड़े भाई के पास ! पूर्णिया जाने के बाद मैं अपने दोस्तों को बहुत मिस करता था ! कभी कभी मैं अपने घर आता तो सरे दोस्त आकर मिलते थे ! फिर दो तीन दिन बाद वापस पूर्णिया चले जाते ! वहां शाम को इंदिरा गाँधी स्टेडियम खेलने जाता था ! किसी दिन क्रिकेट खेलता तो किसी दिन फुटबॉल, बैडमिंटन लेकिन ज्यादा क्रिकेट ही खेलता था ! मैं पूर्णियां में ( रेडिओ स्टेशन ) आकाशवाणी चौक के बगल में रहता था ! जगह का नाम था नवरतन हाउस एंड नवरतन हाता ! बरा ही मजा आता था मेरे को ! ओम कोचिंग सेंटर ( झंडा चौक भटठा बाजार पूर्णिया ) पढ़ने जाता था  और मस्ती में आता था ! 2013 के जनवरी में घर आया ! उसी समय मेरे स्कूल में सभी छात्र और छात्राओं को 2500 रूपये मिल रहे थे साईकिल के लिए ! सारी लडकियो को 1000 रूपये ज्यादा मिले वो स्कूल ड्रेस के लिए मिला ! मेरे को भी 2500 रूपये मिलते ही दो से तीन दिन के अंदर ही साईकिल ख़रीदा ! संजय साईकिल स्टोर मंगला बाजार ( मंगल बाजार ) से 3650 रूपये में हीरो जेट गोल्ड कंपनी का ! जहा तक मुझे याद है 03 या 04 फरबरी 2013 को ! फिर कुछ दिन बाद वापस पूर्णियां चला गया ! 15 फरबरी 2013 ( शुक्रवार को ) सरस्वती पूजा था उस दिन और एक खास बात ये था की मेरे रूम मालिक गिरिजानंद सिंह ( रमन सिंह ) के बेटे वरुण भईया की शादी था ! उनके यहाँ लड़की वाले लड़के के यहाँ बारात लेके आते हैं ऐसा रिवाज था ! शिव जी के मंदिर में शादी हुई ! हमलोगो को भी काफी मजा आया ! शादी के बाद हम और मेरे भईया दोनों अपने अपने पढाई में लग गया ! जहा तक मुझे याद है की मैं मई के पहला सप्ताह में ही घर आ गया, क्योकि मेरे भैया दिल्ली आने का रिजर्वेसन बना लिए थे ! तब तक में मेरा नाइन कक्षा का परीक्षा शुरू होने वाला था ! मेरे को मालूम चलते ही मैं स्कूल जाना शुरू कर दिया ! जून में मेरा परीक्षा हुआ ! मेरी परीक्षा ख़त्म होते ही मैं अपने फुआ के घर ( सरसंडी ) चला गया पढाई करने के लिए ! कुछ दिन तक घूमने के बाद पता चला कि ग्वालपाड़ा मार्किट में नव प्रभात पब्लिक स्कूल ( प्राइवेट है ) जो सबसे अच्छा है ! सरसंडी से 1.5 km के आस पास होगा !  मैं अपने फुआ के बेटे ( संजय कुमार मेहता ) संजय भैया के साथ स्कूल ( कोचिंग ) गया और नामांकन लिया ! ( शायद 300 या 400  रूपये नामांकन फीस था मुझे ठीक से याद नहीं है, और मंथली फीस शायद 300 या  350 रूपये था ! उस कोचिंग के डायरेक्टर का नाम राकेश कुमार और प्रवेश प्रभारी इंद्रदेव सर ( सरसंडी के रहने वाले ) और भी कुछ सर को संजय भैया जानते थे !  मैं अगले दिन सुबह से क्लास आना शुरू कर दिया ! सुबह 05 से 09 बजे तक किसी -किसी दिन को 10  बजे तक पढाई होती थी ! और शाम को  03 से 05 बजे तक किसी-किसी दिन 03 से 06 बजे तक पढाई होती थी ! रविवार को एक्स्ट्रा क्लास होती थी !एग्जाम नजदीक आने पर और एक्स्ट्रा क्लास होती थी ! 

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